सिर्फ एक फ्रेंड ही जरुरी होता है
यारों की बात यारों से ।
दोस्तों की बात दोस्तों से।।
बहुत से लोग पूछते हैं दोस्ती का मतलब क्या होता है जहां मतलब शब्द का प्रयोग हो जाता है वहां दोस्ती नहीं रह जाती जरूरी नहीं है कि आप के हजारों दोस्त हो सिर्फ एक हो दिल का साफ हो। दोस्ती का मतलब क्या होता है 4 पैक वाला या वो दोस्त जो कभी टेबल पर आपके साथ ना बैठे लेकिन बुरा वक्त जब हो हमसे पहले उसको दर्द हो वह दोस्त होता है। एक कहानी है बहुत छोटी सी मेरे बाबा जी ने मुझे सुनाई थी आपसे भी शेयर करता हूं शायद आपको भी अच्छी लगे ज्ञान बाबा जैसी नहीं है बहुत ही सिम्पल है एक लड़का होता है वह बड़े-बड़े अमीरों के साथ रहता है उसके पिताजी फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी होते हैं एक रात पिताजी बोलते हैं बेटा कहां जाता है मिलता नहीं है आजकल बेटा बोलता है यू नो डैड बहुत सारे दोस्त हैं उनके साथ चिल करता हूं। पिताजी ने पूछा होता क्या है वहां ....बेटा बोलता है बड़े-बड़े ऑफिसर्स के बेटे बड़े-बड़े बिजनेसमैन, नेताओं के बेटों के साथ रहता हूं पिताजी बोलते हैं ठीक है। थोड़ा घर पर भी ध्यान दिया करो। बेटा बोलता है नो मैन माय फ्रेंड आर मोस्ट इंपोर्टेंट फॉर मी पिताजी बोलते हैं ठीक है बेटा अच्छी बात है।
रविवार को सुबह-सुबह पिताजी उठते हैं और बेटे को बोलते हैं बेटा मेरा एक छोटा सा काम कर दो तेरे तो बड़े-बड़े दोस्त हैं मुझे 10,000 रुपए चाहिए 5000 रुपए तो मेरे पास है 5000 रुपए का इंतजाम तुम कर दो अपने दोस्तों से। तो बेटा बोलता है सिर्फ 5K ओके डैड मैं 10 मिनट में आपको देता हूं फिर बेटा पूरा दिन घूमता है और दोस्तों के तो वही 3 4 जनरल जवाब होते हैं-
पहला- यार थोड़ी लेट हो गया भाई अभी दे दिया किसी को।
दूसरा- यार मेरे पास खुद नहीं है दूसरे से लिया है।
तीसरा- अच्छा रुको इंतजाम करता हूं फिर या तो हो ही नहीं पाया या तो फोन ही नहीं उठेगा।
तो यही पता पड़ जाता है ....
मंदिर जाने के लिए बहुत कम लोग मिलते हैं।
लेकिन बोतल खोलने के लिए हजारों मिल जाते हैं।।
तब दोस्त के दोस्त भी आ जाते हैं चिल करने के लिए चिल करने में कोई बुराई नहीं है या उम्र ही होती है चिल करने के लिए लेकिन पहले आंक ( परख) तो लो जैसे पैंट शर्ट कुछ भी लेने जाते हैं तो उसको 10 बार देखते है वैसे ही क्योंकि दोस्त इतना छोटा शब्द नहीं होता है खैर.....
तो कहानी पर फिर वापस आते हैं तो बेटा अपने पिताजी के पास जाता है बोलता है अरे जाने दो डैड मैं उसके बारे में कुछ बात नहीं करना चाहता हूं और आप क्या जानो आपका तो कोई दोस्त नहीं है तो पिताजी बोलते हैं हां बेटा तुमने सही कहा मैं तो काम में बिजी रहता हूं मेरा तो कोई दोस्त ही नहीं है उसी रात को तीन चार बजे पिताजी बेटे को उठाते हैं और एक सुनसान गली से होते हुए एक झोपड़ी में ले जाते हैं और आवाज लगाते हैं जब तक कोई बाहर आए तभी उनका बेटा बोलता है क्या डैड कहां ले आए मुझे गंदी सी जगह तभी अंदर से एक बूढ़ा व्यक्ति बाहर आता है और देखते ही बोलता है यार मेरे यहीं रुक और अंदर चला जाता है बेटा बोलता है क्या यार कहां ले आए डैड यह तो आप को बैठने तक के लिए नहीं पूछ रहा है तभी वह बूढ़ा व्यक्ति फिर बाहर आता है तब उसके एक हाथ में तलवार होती है और दूसरे हाथ में गठरी होती है जिसमें कुछ गहने होते हैं और बोलता है यार अब बता अब मैं तैयार हूं अगर मेरे यार को किसी ने कुछ बोला है तो गर्दन उतार दूंगा और अगर तुझे पैसों की जरूरत है तो यह मेरी बेटी की शादी के गहने हैं ले जाओ क्योंकि तू रात को आया है तो एक बात तो पक्की है कि मेरा यार किसी मुसीबत में है और 20 साल बाद मिलने आया है तो बता तेरा ये यार किस काम का है।
तो उस दिन से उस बेटे को समझ आता है कि दोस्त एक बनाओ हजारों पर भारी ।
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