चिट्ठी वाले हनुमान जी

गोमती नदी के किनारे बना यह मंदिर लखनऊ विश्वविद्यालय के ठीक सामने है लखनऊ के लोग इस मंदिर को हनुमान सेतु के नाम से जानते हैं इस मंदिर के हनुमान जी को चिट्ठी वाले हनुमान जी कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इस दरबार में भक्त चिट्ठी भेज कर अपनी फरियाद लगाते हैं जो भक्त नहीं पहुंच पाते हैं वह लोग चिट्ठी लिख कर भेजते हैं और पुजारी उस चिट्ठी को हनुमान जी के सामने पढ़ कर भक्त के फरियाद को सुनाते हैं

मंदिर के पुजारी के मुताबिक मंदिर की स्थापना उत्तर भारत के बहुत बड़े संत बाबा नीम करौरी महाराज ने की थी 1960 में गोमती नदी में आई बाढ़ में मंदिर का ढांचा बह गया लेकिन बजरंग बली की प्रतिमा अपने ही स्थान पर वैसी की वैसी खड़ी रही इसके बाद लखनऊ को बाढ़ से बचाने के लिए पुल को बनाने की योजना बनाई गई लेकिन पुल को बनते-बनते उस का ढांचा तीन बार ढह गया तब पुल बनाने वाला ठेकेदार बाबा नीम करौरी महाराज की शरण में गया तब बाबा ने कहा हनुमान जी ने रामेश्वरम पुल का निर्माण किया था तो तुम हनुमान जी के मंदिर के निर्माण का संकल्प करते हुए पुल का निर्माण करो तब तुम्हें सफलता मिलेगी और तभी से इस मंदिर को हनुमान सेतु के नाम से जाने जाने लगा बाबा ने ही कहा था  यह मंदिर इतना प्रसिद्ध होगा कि लोग यहां पत्र के द्वारा अपना दुख दर्द बता सकेंगे ।

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