कैसे बयां करूँ मैं तुमको - कविता - वान्या दीक्षित

वान्या दीक्षित
कविताओं से लोगों का मन मोह लेने वाली वान्या दीक्षित ने मेरे स्वभाव पर कविता लिखकर मुझे आईना सा दिखाया है ।
कविता कुछ यूं है -

कैसे बयां करूँ मैं तुमको
कितनी मैं तारीफ करूँ 
जिसने है बनाया तुमको
कैसे उसका दीदार करूँ
करते हो जो कुछ भी मन से 
सफल वहीं हो जाते हो
जग में इतना नाम तुम्हारा
गुरूर नहीं दिखलाते हो
बोली में एक मीठापन है
मुस्कान बड़ी मनमोहक है
लाखों हैं लोग दीवाने तेरे
एक अपनेपन सी सूरत है
कह जाते हो कभी कहीं कुछ
कभी कोई पाठ पढाते हो
हँसवाते हो हम सबको इतना
बातें कहाँ से लाते हो
तुझमें है मन की सुन्दरता
एक नाजुक सी गहराई है
साथी हो तुम सूरज के
वो तेरी ही परछाई है
तुम अपनी नई उड़ानों से
उस आसमान को छू लेना
छू लेना तुम चंदा तारे
तुम नई उमंगे भर लेना !!

वान्या दीक्षित, छात्रा
पत्रकारिता विभाग,
लखनऊ विश्वविद्यालय

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